महाबोधी सोसायटी के संस्थापक श्रीमत अनागारिक धर्मपाल जी की 155वीं जयन्ती मनाया गया  

राष्ट्रीय

महाबोधी सोसायटी   के संस्थापक श्रीमत अनागारिक धर्मपाल जी की 155वीं जयन्ती मनाया गया  
रिपोर्ट 
प्रशांत कुमार पप्पु
  गया बोधगया
महाबोधि विद्यापीठ परिसर में महाबोधि अन्तर्राष्ट्रीय पालि एवं बौद्ध अध्ययन संस्थान का उद्घाटन किया गया। बिहार के राज्यपाल श्री फागू चौहान, श्रीलंका के भारत में उच्चायुक्त श्री आस्टिन फर्नाण्डो, नव नालन्दा महाविहार के कुलपति प्रो. वैद्यनाथ लाभ ठज्डब् के सचिव तथा महाबोधि सोसाइटी के अध्यक्ष श्री एन. दोरजे अति विषिष्ट अतिथियों में थे। इस अवसर पर एक षिलापट्ट का अनावरण कर संस्थान का उद्घाटन किया गया।
इस अवसर पर दीप प्रज्जवलित होने एंव सूत्रपाठ के पष्चात् महाबोधि सोसाइटी के महासचिव भदन्त पी. सीवली थेर ने अपने स्वागत भाषण में कहा कि अनागारिक धर्मपाल जी बौद्ध षिक्षा के प्रति अति संवेदनषील थे। उनका मानना था कि बौद्धों को विषेषकर बौद्ध संन्यासियों को षिक्षित तथा ज्ञानी होना चाहिए। उन्हें धार्मिक ज्ञान से पूर्ण शुद्ध आचरण एवं तर्कषक्ति से संपन्न होना चाहिए। आज इस संस्थान के प्रारंभ होने से धर्मपाल जी के सपने को साकार रूप देने के प्रयास को गति मिली है। आषा है कि यहां अध्ययन करने वाले देष-विदेष के छात्र पालि साहित्य एवं बौद्ध विषयक अध्ययन सुविधा पूर्वक कर सकेंगे।
नव नालन्दा महाविहार के कुलपति प्रो. वैद्यनाथ लाभ ने कहा कि प्राचीन काल में जैसे नालन्दा तत्कालीन विष्व के लिए विद्याध्ययन का आकर्षण केन्द्र था वैसे ही बोधगया आधुनिक काल का बौद्ध अध्ययन का विषेष केन्द्र बनेगा। इस अवसर पर उद्घाटनकर्त्ता श्रीलंकाई उच्चायुक्त श्री ऑस्टिन फर्नाण्डो ने कहा कि बौद्ध साहित्य त्रिपिटक पालि भाषा में है और वह बौद्ध अध्ययन का मूल स्रोत है। पालि का ज्ञान मूल साहित्य ज्ञान को प्राप्त करने में सहायक एवं सक्षम होगा। श्रीलंका पालि त्रिपिटक को विष्व धरोहर की सूची में प्रविष्टि हेतु प्रयासरत है। यह भारतीय संस्कृति का एक सबल पक्ष भी है, जिसे संजोना एक पुनीत कार्य होगा। महाबोधि सोसाइटी ने इस संस्थान की स्थापना कर एक सराहनीय कार्य किया है।
मुख्य अतिथि के पद से संबोधित करते हुए बिहार के राज्यपाल, श्री फागू चौहान ने कहा कि बोधगया का स्थान विष्वभर में बौद्धों के लिए सर्वोपरि है, यह महानतम बौद्ध तीर्थस्थल भी है। यहां देष-विदेष के सैकड़ों विहार है तथा इनमें अनेक देषों के लोग रहते हैं। पालि बौद्ध अध्ययन संस्थान के माध्यम से इन्हें दोहरा लाभ मिलेगा। पूजा-अर्चना, श्रद्धा-समर्पण के साथ-साथ बौद्ध साहित्य संबंधी ज्ञान एवं उपाधि भी अर्जित कर सकेंगे। यह सबकुछ विधिवत चलेगा तो निष्चय ही भविष्य में महाबोधि सोसाइटी का यह अध्ययन केन्द्र, बौद्ध षिक्षा जगत का मुख्य केन्द्र बन सकता है।
इस अवसर पर विद्यार्थियों के बीच आयोजित प्रतियोगिता के परिणाम में प्रथम स्थान पाने वाले बारह बच्चों को प्रमाण-पत्र के साथ पुरस्कृत किया गया। विषिष्ट अतिथियों को समृति चिह्न दिए गए। सम्बोधि पत्रिका वर्ष 2019 अंक का विमोचन किया गया। महाबोधि सोसाइटी के शासी निकाय के सदस्य श्री कैलाष प्रसाद ने धन्यवाद ज्ञापन किया। प्रभारी भिक्षु सद्धातिस्स थेर ने सिंहल भाषा में व्याख्यान दिया, जिसे सुनकर सभा में उपस्थित लगभग तीन सौ सिंहली तीर्थयात्री हर्षित हुए।
आज पठन-पाठन के प्रथम दिवस पर लगभग बाईस विद्यार्थी उपस्थित हुए जिनमें वियतनाम की भिक्षुणी समुदाय, के अतिरिक्त म्यांमार और पूर्वोत्तर भारत के कई भिक्षु शामिल हुए। आज का अध्यापन कार्य प्रो. कैलाष प्रसाद, श्री किरण लामा, भदन्त पी. सीवली थेरो, म्यांमार के डा. यू. जावाना एवं एक जापानी षिक्षिका डा. एम कातायामा ने किया।


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