शानदार रहा साहित्य सृजन मंच द्वारा आयोजित कवि सम्मेलन

अंतरराष्ट्रीय

सीतापुर

बिसवां

(शानदार रहा साहित्य सृजन मंच द्वारा आयोजित कवि सम्मेलन)

साहित्य सृजन मंच, बिसवाँ द्वारा लल्लू राम सावित्री देवी शिक्षण संस्थान परिसर गेरुहा में विराट कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में भाजपा पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के जिला अध्यक्ष रामजीवन जायसवाल और विशिष्ट अतिथि के रूप में जिला पंचायत सदस्य उत्तम शर्मा व भाजपा मंडल अध्यक्ष सतीश वर्मा पूरे समय मौजूद रहे।

कवि सम्मेलन की अध्यक्षता का उत्तरदायित्व शिक्षण संस्थान के प्रबंधक वयोवृद्ध लल्लूराम जायसवाल जी ने स्वीकारा और संचालन की कमान संभाली साहित्यकार संदीप सरस ने। 

लोकप्रिय कवि अरुण गंवार की प्रांजल वाणी वंदना से कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ हुआ फिर ओज के प्रसिद्ध हस्ताक्षर रजनीश मिश्र ने अपनी प्रभावशाली कविताओं से पूरे माहौल को देशभक्ति की भावना से ओतप्रोत कर दिया- दमकती भाल पर बिन्दी छटा अनुपम है आली है। खनकती चूडियां हाथो की महिमा भी निराली है।कभी प्रेयसि कभी वात्सल्य की प्रतिमूर्ति लगती है,कभी झांसी की रानी है कभी दुर्गा है काली है।

अपने अलहदा तेवर की कविता के लिए प्रख्यात सीतापुर से वरिष्ठ कवि कार्तिकेय शुक्ल ने अपने सम्मोहक काव्य पाठ से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया- हमने जंगल काटकर घर बनाया। इसीलिये अमंगल हो गया है।हमारा घर,अब घर नहीं रहा बस एक जंगल हो गया है।

संयोजक संदीप सरस ने अपने काव्य पाठ में मुक्तक और ग़ज़लों से समा बांधा- बड़ा कितना भी हो जाऊँ, वो बचपन याद आता है।पुराने  घर में था मेरे, जो आँगन, याद आता है।निवाले गोद में अपनी बिठा करके खिलाती थी,मेरे गालों पे अम्मा का वो चुम्बन याद आता है।

जनपद फतेहपुर से आए प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ शैलेश गुप्त वीर के सशक्त काव्य पाठ ने अपना भरपूर असर छोड़ा- नैतिकता बौनी हुई, यांत्रिक हुए उसूल।आज द्वारिकाधीश को, गया सुदामा भूल।।

सुकवि राम कुमार सुरत की तमाम गांव घर आंगन से जुड़ी अवधी रचनाओं को श्रोताओं ने झूम के सुना- चले आओ बदरा बरसाओ पानी। हास्य के सशक्त हस्ताक्षर अरुण गँवार के चुटीले व्यंग्यों ने श्रोताओं को कुर्सियों से उछलने पर मजबूर कर दिया- हमारे गाँव मा सियार ब्वालै हुक्की हुआ।

व्यंग्य के हाहाहूती कवि रामदास रतन ने अपनी रचनाओं से पंडाल को कहकहो में तब्दील कर दिया- गांव गली मा बइठि डॉक्टर आला खूब लगावैं। दवा देति हैं सब मर्जन की मर्ज समझ ना पावैं।बाबा बेचे बालमखीरा। ब्वालौ का करी।

सशक्त रचनाकार आनंद खत्री  की शानदार प्रस्तुति कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए-घास की रोटी खायी थी पर स्वाभिमान न छोडा, दुश्मन जिससे रहा काँपता था प्रताप महाराणा।

मंच पर श्रृंगार के कवि अरविंद मधुप ने अपनी प्रस्तुति ने श्रोताओं को सम्मोहित कर लिया-अंतर्मन की करुण वेदना, जिस दिन शोर मचाएगी। चाहे जो कोशिश कर लो तुम, रोके रुक ना पाएगी।

ओजस्वी रचना का युवा स्वर नैमिष सिंह ने प्रभावी प्रस्तुति से श्रोताओ की भरपूर तालियाँ बटोरीं- हे भारत के वीर पूत बलिदान न खाली जाएगा। जब याद तुम्हारी आएगी जग सारा अश्रु बहायेगा।

सीतापुर से आए व्यंग्यकार तुषार मिश्र की रचनाएं  खूब सराही गई।बड़ी देर तक विकलांग व्यवस्था को दिव्यांग बताते रहे।आप और हम मूक बधिरों की तरह बैठकर केवल तालियाँ बजाते रहे।

युवा कवि सन्दीप वर्मा को श्रोताओं ने मन से सुना और उनके प्रथम काव्यपाठ को श्रोताओं का भरपूर प्यार मिला। नहीं चाहिए हिस्सा भैया  मायका सजाए रखना। बेटी हूं मैं इस घर की सम्मान बनाए रखना।

कार्यक्रम में रजनीश मिश्र कार्तिकेय शुक्ल, अरुण गंवार संदीप सरस, शैलेश वीर, रामकुमार सुरत, रामदास रतन, तुषार मिश्र, आनंद खत्री, अरविंद मधुर, नैमिष सिंह और संदीप वर्मा ने अपने काव्य पाठ से काव्य समारोह को ऊंचाइयां प्रदान की।

कार्यक्रम को काशीराम वर्मा, मुस्तफा जी, रमाशंकर वर्मा, रजनेश, राजकिशोर, विवेक गौतम, आलोक, अनुराग, रविंद्र जयसवाल, राजाराम, विवेक, अखिलेश, सुरेंद्र, दिलीप, अंकित आदि ने अपनी उपस्थिति से  सफल बनाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

देर रात तक चले इस शानदार कार्यक्रम के आयोजक कमल किशोर जायसवाल और संयोजक साहित्य सृजन मंच की ओर ने सभी आए हुए कवियों अतिथियों और श्रोताओं का आभार व्यक्त किया।


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