छापेमारी न करने के एवज में साल भर वसूली त्योहारों पर निरीह दुकानदारों से सेम्पुलिंग

राष्ट्रीय

छापेमारी न करने के एवज में साल भर वसूली
त्योहारों पर निरीह दुकानदारों से सेम्पुलिंग

जौनपुर। नगर समेत जिले के कस्बों एवं इलाकों में खुलेआम खुले में मांस बेचा जा रहा है। जिससे संक्रामक व वायरल बीमारियों का शिकार लोग हो रहे हैं। विभागीय अधिकारी इसे लेकर अंजान सा बने हुए हैं।
  नगर व आसपास के इलाकों में बिना किसी अनुमति के जहां-तहां मनचाहे तरीके से खुले में ही बकरा, मुर्गा व मछली आदि का मांस काटा जा रहा है। जिस पर मक्खियों का सीधा प्रकोप होता है। जो बीमारी फैलाते हैं।
 लंबे समय से खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने मांस बेचने वालों की जांच नहीं किया है। इस दौरान अवैध रुप से मांस बेच रहे   लोगों को चिहित जाय तो कई दर्जन को नोटिस दी जा सकती है। लेकिन स्वास्थ विभाग के इन्सपेक्टर और अन्य कर्मचारी महीने भर क्या करते हैं। विभाग के अधिकारी इसकी समीक्षा षायद नहीं करते। सरकार ने लोगों को मिलावटी खाद्य पदार्थो की विक्री रोकने और ऐसा करने वालों के खिलाफ कार्यवाही के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग की स्थापना की है लेकिन यह विभाग सफेद हाथी साबित हो रहा है। कुछ गिने चुने त्योहारों के अलावा यह कोमा में रहते हुए अपनी जेब भरने में लगा रहता है। मोटी रकम वेतन के रूप में तथा अवैध कमाई करके सरकार की मंषा पर पानी फेरने वाले इस विभाग की तरफ जिला प्रषासन भी निष्क्रिय रहता है। जिसका नतीजा यह होता है। नगर में दर्जनों नामी गिरामी मिष्ठान के दुकानों पर घटिया और मिलावटी सामान बिक रहा है लेकिन उसपर कभी छापेमारी नहीं की जाती और बदले में लाभ वसूला जाता है। पूरे दिन विभाग के जिम्मेदार अधिकारी क्या करते है यह लोगों की समझ में नहीे आता। कुछ लोगों का कहना है कि पूरे साल विभाग वसूली में मषगूल रहता है और होली, दषहरा, दीवावली, रक्षाबन्धन जैसे अंगुलियों पर गिने तैयारों में छोटे और निरीह दुकानदारों से नमूने लेकर अपने कर्तव्यों की इतिश्री नहीं की जाती। तेल घी के बड़े कारोबारियों, तेल मिलों और आइस्क्रीम, ब्रेकरी और पपड़ी तथा तमाम तरह के मिठाई बनाने वाले कारखानों की ओर विभाग जांच पड़ताल की जहमत गवारा नहीे करता।


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