लोकतांत्रिक आंदोलन को करेंगे मजबूत,श्याम सुंदर खरवार की शोक सभा में लिया संकल्प प्रस्ताव!

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लोकतांत्रिक आंदोलन को करेंगे मजबूत,श्याम सुंदर खरवार की शोक सभा में लिया संकल्प प्रस्ताव!

*सरफुद्दीन ब्यूरो चीफ की रिपोर्ट जनपद सोनभद्र!*


श्याम सुंदर खरवार के जनपक्षधर वैकल्पिक राजनीति को मजबूत करने के सपनें को पूरी ताकत के साथ पूरा किया जायेगा और दुद्धी में आदिवासी सम्मान, वनाधिकार, रोजगार,सहकारी किसान आंदोलन, कनहर विस्थापित आंदोलन समेत आम जनता के जिदंगी की बेहतरी के लिए जारी लोकतांत्रिक आंदोलन को तेज किया जायेगा। यह संकल्प प्रस्ताव आज रासपहरी स्थित मजदूर किसान मंच व आदिवासी वनवासी महासभा के कार्यालय पर आयोजित शोक सभा में लिया गया। बैठक में उनके वयोवृद्ध पिता व अन्य परिवार जनों के साथ दुख की इस घड़ी में अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए प्रस्ताव में कहा गया कि उनका जन्म भीसुर गांव के एक साधारण किसान परिवार में हुआ था। वह अपने माता पिता की एकलौती संतान थे। बेहद कम उम्र मात्र 18 वर्ष की अवस्था में उन्होंने कम्युनिस्ट आंदोलन की सदस्यता ग्रहण की थी। 2008 में वह देश में जनवादी पार्टी बनाने और जनपक्षधर राजनीतिक विकल्प के निर्माण के लिए किए जा रहे प्रयासों के साथ जुड़े और मृत्युपर्यतं वह जनता की सेवा में इस संगठित आंदोलन व राजनीति के प्रतिबद्ध, समर्पित और अनुशासित कार्यकर्ता बने रहे। वह दुद्धी में मजदूर किसान मंच के संयोजक और सोनभद्र, मिर्जापुर, चंदौली की क्षेत्रीय कमेटी के सदस्य थे। उन्होंने वनविभाग द्वारा आदिवासियों के किए जा रहे उत्पीड़न, मनरेगा, वनाधिकार, कनहर विस्थापितों के आंदोलन व आदिवासी सम्मान समेत तमाम आंदोलन का नेतृत्व किया और उसका अभिन्न हिस्सा रहे। श्याम सुंदर पार्टी में वसूलों पर आधारित सम्बंध निर्मित करते थे। उनकी अपने गांव समेत कनहर विस्थापित गांवों में अच्छी प्रतिष्ठा थी। विगत 1 जनवरी को सड़क दुघर्टना में उनका आकस्मिक निधन पार्टी और दुद्धी में जारी आंदोलन की अपूर्णनीय क्षति है। बैठक की अध्यक्षता मजदूर किसान मंच के संयोजक राजेन्द्र प्रसाद गोंड़ ने की और अध्यक्षता आदिवासी वनवासी महासभा के प्रवक्ता कृपा शंकर पनिका ने किया। 
शोक सभा में वर्कर्स फ्रंट के प्रदेश अध्यक्ष दिनकर कपूर, मुरता के प्रधान डा० चंद्रदेव गोंड़, पूर्व बीडीसी रामदास गोंड़, अनंतलाल खरवार, रामनाथ गोंड़, धनराज गोंड़, मनोहर गोंड़, मंगरू प्रसाद श्याम, इंद्रदेव गोंड़, बलबीर गोंड़, लक्ष्मण गोंड़, रामदेव गोंड़, रमेश सिंह खरवार,कृपाशंकर पनिका, बिरझान गोंड़ आदि ने अपनी बात रखी।


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